सत्यमेव .....

हास्य व्यंग्य एक्सप्रेस

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कृपया मेरी मदद करें ।

Posted On: 21 Jun, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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मोहन जी, बहुत बढ़िया लेख…….मजा आ गया पढके….. मोहन जी, अब आप भी अपनी फोटो अपलोड कर ही लें……..आप के चेहरे के काफी लोग हो गए हैं अब यहाँ…..अपनी ना सही कृष्ण भगवान की ही कर लें, आपमें तो दो-दो कृष्ण समाये हैं…….नहीं तो शेर, चीता, बन्दर, भालू जो भी मिले और उपयुक्त लगे उसे ही अपलोड कर ले….. देख के ही समझ आना चाहिए की ये आपकी पोस्ट है…… टिप्पणी: अदिति कैलाश ।

मित्रों, आप सभी लोग चेहरे वाले लोग हो । खूबसूरत, दमकते, चमकते, चहकते, चेहरे । जब कभी आपकी कोई पोस्ट फीचर्ड रीडर ब्लाग में लिस्ट होती है तो आपके चहरों से या जो भी फूल, सीनरी, बच्चे की फोटू आपने लगाई होती है उससे झट से पता चल जाता है कि चातक जी, मनोज भाई, खुराना जी, अदिति जी, जैक जी, भगवान भाई साहब, वगैरह (दूसरे ब्लागर वगैरह में अपना नाम शुमार समझें) ने नया माल ठेला है । दौड़ कर टिप्पणी कर आओ । टिप्पणी के मामले में घाघ ब्लागरों का अपना ही स्टाईल होता है । वो टिप्पणी पहले कर देते हैं पोस्ट बाद में पढ़ते हैं या फिर पोस्ट फिर कभी पढ़ने के लिये छोड़ दूसरे ब्लाग पर टिप्पणीधर्म निभाने तड़ी हो लेते हैं । हालांकि अभी यह चालूपना जागरण जंक्शन के ब्लागरों ने नहीं सीखा है (या कुछ लोग सीख गये हैं लेकिन पता नहीं चलने देते हैं।) टिप्पणी के मामले में कुछ सयाने ब्लागर दान वाला सिद्धांत अपनाते हैं की दाएं हाथ से टिप्पणी करो और बाएं हाथ को पता भी नहीं चले । जैसे कनाडा में बैठे अपने समीर लाल जी और अपने इलाहाबादी ज्ञान दत्त जी ।

भारत में हिन्दी ब्लागिंग का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है । बस यू समझिये कि कुछ ब्लागर 5 से 7 साल पुराने हैं । कुछ पुराने ब्लागर रिटायर हो चुके हैं । कुछ वी. आर. एस. लेने की सोच रहे हैं । एकाध ब्लागर जैसे ‘फुरसतिया’ अनुप शुक्ल जी पिछले पांच साल से लगातार 100 डिब्बों की मालगाड़ी सी लंबी पोस्टें सरकाते जा  रहे हैं । कुछ ब्लागर ब्लागिंग का शटर डाउन करने की घोषणा के बाद भी तशरीफ में फैविकाल लगा कर जमें हुयें हैं ।

भारत में अगर कोई चीज इफरात में पायी जाती है तो वह है गुटबाजी । (गुटके की बात नहीं कर रहा हूं । अभी 31 मई को ही तंबाकू निषेध दिवस मनाया है ।) ब्लागरों में भी ये तत्व इफरात में पाया जाने लगा है । मैं इसका विरोध नहीं करता क्योंकि अगर एक भारतीय दूसरे को प्रोत्साहित न करे और तीसरे की टांग न खींचे तब फिर वह भारतीय नहीं है। एन आर आई भी नहीं हो सकता है । बिना गुट बनाये क्या कोई सफल हुआ है । नहीं हुआ है न, तब । प्राकृतिक क्रियाओं पर ज्यादा दिमाग नहीं खराब करना चाहिये । ब्लागिंग भी गुटबाजी से अछूती नहीं है और इसे ब्लागिंग के विकासक्रम का एक जरूरी हिस्सा समझना चाहिये । गुटबाजी मतलब दोस्ती और दोस्त की मदद करना । दोस्त के दोस्त को दोस्त समझना और दुश्मन को दुश्मन । लेकिन जागरण जंक्शन अभी अपने शैशवकाल में है और बच्चे तो भगवान का रूप होते हैं । वो तो बाद में संगत खराब होती है । सांसारिक क्रियाएं ।

लीजिए, लिखने कुछ और बैठा था, लिख कुछ और रहा हूं । ऊपर अदिति जी ने शिकायत की है कि आप अपने ब्लाग पर अपना चौखटा  या चौखटे जैसा ही कुछ क्यों नहीं लगाते हैं । ब्लाग पहचानने में दिक्कत होती है । अदिति जी आप ठीक फरमा रही हैं । चौखटे से ही आदमी पहचाना जाता है । चाहे ब्लाग हो या फिर वास्तविक जीवन । 2008 में जब मैंने ब्लागिंग शुरू की तो बहुत समय तक मैंने अपने श्रीमुख की फोटू उस पर नहीं लगाई और न ही मैंने अपना परिचय उस पर दिया । हिन्दी में व्यंगकारों का हश्र मैंने पढ़ रखा था । मेरे द्रोणाचार्य समान गुरूजी स्व. हरिशंकर परसाई जी अपने तीखे व्यंग्यों के कारण दो बाद पिटे थे । स्व. शरद जोशी जी से भी सरकार परेशान रहा करती थी। इसलिये मुझे भी भ्रम हो गया कि मैं जो कि मेरी राय में टापक्लास का व्यंग्य लिखता हूं (लेखक को हमेशा से यह खुशफहमी होती है कि वह उत्कृष्ट साहित्य का सृजन कर रहा है और बाकी सब घास छील रहे हैं ) किसी न किसी दिन पिट कर ही रहूंगा । सो बहुत दिनों तक मैंने अपने ब्लाग ‘सुदर्शन’ पर अपनी फोटू नहीं लगाई । काफी समय तक मैं इसी इंतजार में रहा कि शायद टिप्पणी के माध्यम से ही कोई मुझे कोसेगा, पीटने की धमकी देगा, कोर्ट का सम्मन भिजवायेगा आदि । लेकिन जब इस तरह की कोई घटना नहीं घटी तो मेरा महान व्यंगकार होने का सपना टूटने लगा । साफ बात थी कि मेरे व्यंग्य में न धार थी और न ही नश्तर सी चुभन  । कुछ लोगों ने तारीफें की लेकिन वो तो कविसम्मेलन में खड़े होकर चुटकुला सुनाने वालों की भी होती हैं । तब मैंने सोचा कि प्यारे कृष्ण मोहन अब कोई खतरा नहीं है तू अपनी फोटू लगा सकता है । तब भी मित्रों  मैंने सावधानी बरतते हुये अपनी एक धुंधली सी फोटू ‘सुदर्शन’ पर लगाई । क्या पता कोई शातिर शिकारी अब तक इंतजार में बैठा हो । फोटू लगाई नहीं की डण्डा लेकर हाजिर । ‘आप ही के एम मिश्रा के नाम से ब्लाग लिखते हैं । ?’

तो मित्रों, जब ‘सुदर्शन’ पर फोटू लगाने से कोई नुक्सान नहीं हुआ (महान व्यंगकार होने का ख्वाब टूटा, ये बड़ा नुक्सान था) तो मैंने सोचा कि अब जागरण जंक्शन पर भी अपने श्रीमुख का जिरोक्स चिपका दिया जाये । मैंने अपना वही धुंधला सा फोटू यहां भी चिपकाने की कोशिश की लेकिन पता नहीं क्या बात है कि फोटू चिपका ही नहीं । मैंने कई बार कोशिश की लेकिन हर बार दंतेवाड़ा हो जाता है । फिर अदिति जी ने भी टिप्पणी खेंच मारी की फोटू क्यों नहीं लगाते हो, पहचानने में दिक्कत होती है। मैंने फिर ट्राई मारा लेकिन फोटू था कि चिपकने को तैयार ही नहीं था । ऐसा नहीं कि मैंने एक ही फोटू ट्राई की हो । कई इमेज लगाने की कोशिश की मगर हर बार कोशिश नाकाम हुई । अब हार का आप लोगों से सविनय निवेदन कर रहा हूं कि फोटू चिपकाने का क्या तरीका आप लोगों ने अपनाया है, कृपया मेरा मार्गदर्शन करें । आप लोगों की तकनीकि राय की राह देखता ।

कृष्ण मोहन ।

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

subodh kant misra के द्वारा
June 24, 2010

गुदगुदी बिलकुल अन्दर से हुयी है मिश्रा जी, बधाई स्वीकार करे!

mahesh soni के द्वारा
June 22, 2010

वाह मज़ा आ गया फोटू लगाना तो कोई इनसे सीखे अरे भाई आजकल तो लोग फोटू के चक्कर में अपनी ही भूल जाते हैं.

    kmmishra के द्वारा
    June 23, 2010

    लीजिये साहब हम अपना गमे हाल गुना रहे हैं और आप चटकारे ले ले कर पढ़ कर रहे हैं । एक भले आदमी से एक भली महिला ने रिक्वेस्ट की कि अपना चांद सा चेहरा तो दिखाओ और हम हैं कि मुंह छिपाये घर घुस्सु बने बैठे हैं । एक फोटू तक नहीं लगा सकते । उच्चदर्जे की घामड़पंती का सबूत दे रहे हैं । ब्लाग पर आपका स्वागत है । अभी हाले दिल बहुत सुनाने हें आपको, आते रहियेगा ।

sumityadav के द्वारा
June 22, 2010

मिश्राजी, क्या गजब का व्यंग्य लिखा है। वैसे अपने आप पर व्यंग्य लिखने का भी अपना मजा है। चलिए यह व्यंग्य पढ़के आपसे और सीखने को मिला। आप फोटो लगा ही लीजिए नहीं तो इसी विषय पर ब्लागरों में व्यंग्य लिखने की रेस लग जाएगी। एक तरह से अच्छा ही है आप जागरण जंक्शन पर हॉट टापिक तो बने रहेंगे।

    kmmishra के द्वारा
    June 23, 2010

    सुमित बाबू अपने पर व्यंग लिखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक तो दूसरों को आपकी धोती खींचने का सुख नहीं मिल पाता और दुनिया की नजरों में भी आप बड़े सच्चे लेखक बने रहते हैं ।

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
June 21, 2010

सर आप निः संदेह बहुत अच्छे व्यंगकार हैं …………….. आप का हर लेख पढ़ कर बहुत अच्छा लगता है ……….. अगर आपकी फोटो अपलोड नहीं हो रही है तो या तो हो सकता है आपकी फोटो का साइज़ (सेव करने के लिए जरूरी मरोरी) 1MB से अधिक हो, अगर ऐसा है तो आप अपनी फोटो को ms paint par open kar usaka size image menu ke stretch/skew submenu par click kar ke current size ko 100 X 150 karane ke liye required ratio men HORIZONTAL AUR VERTICAL KE SAAMANE LAGE TEXTBOXEs MEN VALUES TYPE KARAKE OK PAR CLICK KARE …..ISAKE BAAD FILE menu men ja kar save as option par click kar ke kahi save kar len ab is newly saved image ko upload karane ki koshish kare sambhavatah aap ka kam ho jaaye…….. agar phir bhi nahi hota to aap error message jaroor post karen……..

    kmmishra के द्वारा
    June 22, 2010

    शैलेश जी मार्गदर्शन के लिये धन्यवाद । इस सुक्ति को में आजमा कर देखता हूं ।

Chaatak के द्वारा
June 21, 2010

मिश्र जी, अब आप एक फोटू चस्पा मार ही दो, नहीं तो आप अपने व्यंग के कारण पिटे न पिटे आपकी फोटू को लेकर ब्लागरों में बहस जरूर शुरू हो जाएगी, बहस शुरू हुई तो गुटबाजी होगी, गुटबाजी हुई तो इलेक्शन होगा, इलेक्शन हुआ तो अपोजीशन होगा, अपोजीशन हुआ तो हंगामा होगा, हंगामा हुआ तो फिर बहस होगी बहस हुई तो ………… अब समझ जाइए (ढाक के तीन पात)

    kmmishra के द्वारा
    June 21, 2010

    चातक जी, हास्य व्यंग्य के मामले में आप भी कमजोर नहीं है । टिप्पणी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया । फोटू लगाने की कोशिश कर रहा हूं । अपनी नहीं तो किसी कबूतर, कौवे, जानवर की जरूर लगा दूंगा ।

allrounder के द्वारा
June 21, 2010

मिश्राजी अदितिजी की सलाह के अनुसार लगे रहिये ! कभी न कभी तो आप फोटो अपलोड करने मैं कामयाब हो ही जायेंगे ! और हम लोगों को एक महान व्यंगकार के दर्शन लाभ हो जायेंगे !

    kmmishra के द्वारा
    June 21, 2010

    ”महान व्यंगकार“ । देखा अगर मैं न बताता आप लोगों को कैसे पता चलता कि मैं महान व्यंगकार हूं । महान लेखकों को अपने बारे में कभी कभी ऐसी अफवाहें खुद ही उड़ानी चाहियें । जलने वाले इसे अपने मुंह मियां मिट्ठू कहते है लेकिन सभी को संतुष्ट तो किया नहीं जा सकता है । आलोचकों का भी अपना स्थान है । टिप्पणी के लिये धन्यवाद ।

R K KHURANA के द्वारा
June 21, 2010

प्रिय मिश्र जी, बहुत सुंदर व्यंग लिखते हैं आप ! मेरी बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    kmmishra के द्वारा
    June 21, 2010

    खुराना जी टिप्पणी के लिये धन्यवाद । देखिये फोटू लगाने की कोशिश कर रहा हूं । लग जायेतो एक बार फिर बधाई दीजियेगा । बड़ी मेहनत का काम है ।

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
June 21, 2010

हास्य और व्यंग के खेल में आप माहिर खिलाडी हैं..मिश्रा जी…. फिर एक बार बहुत सुंदर ब्लॉग..एक ताजगी सी आ जाती है थोडा हंसने के बाद….धन्यवाद आपका सुंदर ब्लॉग के लिए…सादर

    kmmishra के द्वारा
    June 21, 2010

    शिवेन्द्र जी ब्लाग तो सुंदर हे लेकिन मेरा श्रीमुख कटहल जैसा प्रभावशाली है । व्यंग्य की बात तो ठीक है लेकिन तकनीकि राय अभी तक किसी ने नहीं दी । मेरा हौसला बढ़ाने के लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

aditi kailash के द्वारा
June 21, 2010

क्या बात है मोहन जी, तो आपने निर्णय ले ही लिया अपना अवतार बदलने का………अच्छा लगा पढ़कर…. आप तो इस मंच पर व्यंग्य के बादशाह हैं, पर अब पहले जैसा पिटाई करने का माहौल नहीं रहा, सो अब डरिये मत……. आपके मन में अभी भी डर है शायद की कहीं फोटो पहचान कर लोग पिटाई ना कर दे, इसलिए फोटो डर के मारे अपलोड नहीं हो रही है…… यहाँ फोटो अपलोड करने में हर किसी को दिक्कत आती है……मुझे भी ४-५ दिन लग गए थे और मैंने उस खीज में एक व्यंग्य भी लिखा था “मेरा नया अवतार” पढियेगा, मजा आएगा…..तो आप भी कोशिश करते रहिये १-२ नहीं पचासों बार करिए…..और जब आपकी फोटो पसंद आ जाएगी तो किसी दिन अपने आप अपलोड हो जाएगी….. तो लगे रहिये…….हमारी शुभकामनायें….

    kmmishra के द्वारा
    June 21, 2010

    अदिति जी उत्साह बढ़ाने के लिये शुक्रिया । आपका कहना है कि मुन्ना भाई कि तरह लगे रहना पड़ेगा । कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती । आपका लिखा व्यंग्य ‘मेरा नया अवतार’ मैं जरूर पढूंगा, आभार ।

Nikhil के द्वारा
June 21, 2010

मिश्राजी, अप सच मैं व्यंग्य के बादशाह हैं. आपको कोई ग़लतफहमी नहीं, अप व्यंग्यों के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्य का सृजन करते हैं और करते रहिये. शुभकामना.

    kmmishra के द्वारा
    June 21, 2010

    निखिल जी, आप मेरे सच्चे मित्र हैं । एक सच्चा मित्र ही ऐसी राय बिना किसी लाग लपेट के दे सकता है कि ”आप सच मैं व्यंग्य के बादशाह हैं ।“ हालांकि सच्ची बात थोड़ी कड़वी होती है लेकिन खुशी इस बात की है कि आपने मुझे सच्चाई से अवगत करा कर मित्र धर्म का पालन किया । आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।


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