सत्यमेव .....

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मदहोश करने का पक्का सरकारी इंतज़ाम

Posted On: 7 Aug, 2010 में

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=>हिक्क! मदहोशी का डबल तड़का । सुरा और सुंदरी दोनो साथ- साथ । आखिर प्रशासन ने हमारी सुध ले ही ली । ठीक सामने पुलिस की चेतक रात दिन पहरा देती रहती है ताकि कोई नासपीटा हमारे आनन्द में बाधा न पहुंचाये । शाबाश ! पहली बार अच्छा इंतजाम किया है सरकार ने हम बेवड़ों के लिए । हिक्क!

->ये है इलाहाबाद का प्रतिष्ठित Girls इंटर कालेज ”सेण्ट एंथोनी Girls इंटरमिडियट कालेज“ और उससे मात्र पचास मीटर की दूरी पर शासनादेश और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेशों की खिल्ली उड़ाती अभी हाल ही में शुरू हुयी ये ठेका देशी शराब की दुकान । जल्दी ही मिड डे मील की जगह सरकारी देशी शराब के ठेके ले लेंगे और सरकार की शिक्षा नीति भी बदल कर “खूब पियो, खूब पढो” हो जायेगी ।

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Arvind Pareek के द्वारा
August 10, 2010

प्रिय श्री मिश्रा जी, रिपोर्टिंग के साथ व्‍यंग का तड़का – जल्दी ही मिड डे मील की जगह सरकारी देशी शराब के ठेके ले लेंगे और सरकार की शिक्षा नीति भी बदल कर “खूब पियो, खूब पढो” हो जायेगी । लाजवाब है । अरविन्‍द पारीक

allrounder के द्वारा
August 7, 2010

शराब के ठेके खतरे मैं ?

Ramesh bajpai के द्वारा
August 7, 2010

मिश्रा जी आये दिन अखबारों में पढ़ने को मिलता है की फला जिले के आबकारी बिभाग ने इस बार इतने प्रतिसत ज्यादा कमाई की अधिकारियो की तरक्की होती है जनता की राम जाने . आपका प्रयास सराहनीय है बधाई

chaatak के द्वारा
August 7, 2010

मिश्र जी, आपने जिस तरह के मदहोश प्रशासन की बात यहाँ की है कमोवेश सारे यू०पी० का हाल ऐसा ही है| शराब की अवैध ठेकियाँ प्रशासन को अतिरिक्त आमदनी और वैध ठेकियाँ मुफ्त नशा उपलभ करवा रही हैं| प्रशासन इनसे पूरी तरह संतुष्ट है और पूरे मनोयोग से इनकी हिफाज़त कर रहा है| अगर किसी बड़े अधिकारी या न्यायाधिकारी की नज़र इस पर पड़ती है तो कभी-कभी वो बुरा मान जाते हैं कि ‘बताओ इतनी अवैध और वैध शराब मेरे शहर में बे-रोक टोक बिक रही है और मैं प्यासा मर रहा हूँ!’ मुस्तैद प्रशासन तुरंत साहब की सेवा कर उनका भी आशीर्वाद ले लेता है| एक बात मुझे समझ में नहीं आई कि ये दृश्य और हालात आपके कैमरे और लेखनी को दिखी लेकिन खुद को जनता के भलाई के लिए समर्पित कहने वाले अखबारों और मीडिया के लोगों (जिसमे न्याय के लिए आवाज़ उठाने वाला ये मंच भी शामिल है,) को ये सब दिखाई क्यों नहीं दिया कहीं इन अखबारों और मीडिया कर्मियों की सेवा भी तो मनोयोग से नहीं हो रही? नहीं अखबारों और मीडिया के रिपोर्टर गलत नहीं हो सकते चाहे जागरण से पूछ लीजिये| मुझे तो मिश्र जी के ऊपर ही शक हो रहा है| आपको हिस्सा नहीं मिला इसीलिए आपने बेचारे को बदनाम करने की साजिश की है| गलत बात है मिश्र जी, आप किसी अखबार के रिपोर्टर बन जाइए आपको भी हिस्सा मिल जायेगा| यही है- हिन्दुस्तान भेड़िया-धसान!

R K KHURANA के द्वारा
August 7, 2010

प्रिय मिश्र जी, सरकार का कच्चा चिटठा खोलने के लिए बधाई ! राम कृष्ण खुराना


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