सत्यमेव .....

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चीटियों की तरह रहते आदमी

Posted On: 13 Aug, 2010 में

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आजादी के 63 साल बाद आज भी भारत में इंसान कीड़े मकोड़ों की तरह रह रहा है । ये बेचारे सड़क किनारे प्लास्टिक का टेंट बना कर रहते हैं । कल रात हुयी बारिश ने इनके घर को भिगो डाला । बैठने के लिये सूखी जमीन भी न बची थी इसलिये ये बेचारे चीटें चीटियों की तरह ऊंची जमीन की तलाश में शहर भर के चौराहों पर जमे हुये हैं ।

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Pह है उभरते हुये विकसित भारत की तस्वीर ।


बाहर खुले में खाद्यान्न सड़ रहा है और आदमी भी । दानों को एक दूसरे की पिछले 63 साल से तलाश है । न जाने कब यह इंतजार खत्म होगा ।

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

subhash के द्वारा
August 16, 2010

we should do basic things population control

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
August 14, 2010

मिश्रा जी आज भी हम आजाद कहाँ हुए हैं? पहले गोरे अंग्रेज थे अब काले अंग्रेज हैं. सबसे बड़ी बात है की आज हम मानसिक रूप से भी अपनी कमजोरियों के गुलाम हो गए हैं.

allrounder के द्वारा
August 14, 2010

ऐसे आजाद भारत की कल्पना किसी भी स्वतंत्र सेनानी के मन मैं नहीं रही होगी, हम से कहीं ज्यादा उन शैदों की आत्माओं को हो रहा होगा जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राण गवाए !

आर.एन. शाही के द्वारा
August 14, 2010

इंतज़ार तो तभी खत्म होगा जब व्यवस्था बदलेगी, और व्यवस्था बदलने का इंतज़ार भी कभी खत्म होगा, इसके लिये भी फ़िलहाल इंतज़ार ही करते हैं मिश्रा साहब । सच्चाइयाँ दिखाने के लिये साधुवाद । … आर.एन. शाही ।

soni garg के द्वारा
August 14, 2010

यही है आज का कडवा सच !

Arvind Pareek के द्वारा
August 14, 2010

प्रिय श्री मिश्र जी, यथार्थ के दर्शन करवानें के लिए धन्‍यवाद । मुझे लग रहा हैं कि एडवोकेट व व्‍यंगकार माननीय के.एम. मिश्र अब रिपोर्टर एवं फोटोग्राफर बननें की राह पर है । प्रस्‍तुति अच्‍छी हैं । बधाई । अरविन्‍द पारीक

nikhil के द्वारा
August 14, 2010

सच का प्रकटीकरण है ये लेख , दुखद रूप से हम सामने के हालात भी नहीं देख पाते या देख कर अंजान बनते है ..

काजल कुमार के द्वारा
August 13, 2010

इस गांव में स्वीकारोक्ति के लिए आभार :)

Aakash Tiwaari के द्वारा
August 13, 2010

मिश्रा जी आप ने जो देखा वो लिखा एक ऐसे हकीकत को लिखा जिसकी तरफ आज की युवा पीढ़ी ध्यान भी नहीं देती. बहुत बहुत धन्यावाद . धन्यवाद . aakashtiwaary.jagranjunction.com

Ramesh bajpai के द्वारा
August 13, 2010

मिश्रा जी इकिस्वी सदी के भारत का असली चेहरा उजागर करने की बहुत बहुत बधाई आजादी के ये ६३ साल तो बस यु ही गुजर गए आम आदमी के सपनो का देश बनाना तो दूर उसे मिली भूख और गरीबी मगर ये हालत भी बद्लेगे

R K KHURANA के द्वारा
August 13, 2010

प्रिय मिश्र जी, देश की असली तस्वीर के कुछ नमूने दिखाने के लिए साधुवाद ! ऐसी ऐसी बहुत सी तस्वीरें है ! कई तस्वीरें तो सामने ही नहीं आती ! धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना


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