सत्यमेव .....

हास्य व्यंग्य एक्सप्रेस

29 Posts

624 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 799 postid : 342

जग बौराना : हम संतन से का मतलब !

Posted On 2 Oct, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

लेखक – नरेश मिश्र


पांच दस नम्बरी, महापापी थे । अपराध करने से जी अघा गया । पुलिस के डंडे ने पीठ से साक्षात्कार किया, बुढ़ापा दस्तक देने लगा तो पांचों पापी गेरूआ वस्त्र पहन कर संत बन गये । तीर्थयात्रा को निकले ये संत एक गांव से गुजर रहे थे तो गांववालों की आवाज सुन कर भीड़ के नजदीक चले गये । एक झाड़ी के पास गांववाले साही को लाठियों से पीट रहे थे । साही के बदन पर कांटे होते हैं । लाठियां कांटे पर चटक रही थीं लेकिन साही का बाल बांका नहीं हो रहा था । उन संतों में जो महापापी था, उसने गांव वालों की ओर देखकर कहा – साही मरै मूड़ के मारे, हम संतन से का मतलब (साही सिर पर चोट करने से मर जाती है लेकिन हम संतों को इस बात से क्या लेना देना) । गांववालों ने संत के उपदेश का पालन करते हुये साही के सिर पर लाठियां बरसाईं, साही टें हो गयी ।


राम जन्मभूमि-बाबरी ढांचा विवाद का फैसला आने से पहले और बाद में हमने ऐसे ही मीडिया माहिर संतों के दर्शन किये । प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रिानिक मीडिया में इनदिनों ऐसे ही संतों की भरमार है जो जमालो की तरह आग लगा कर दूर से तमाशा देखते हैं । अखबार का सर्कुलेशन बढ़ना चाहिये, चैनल की टीआरपी रैंकिंग बढ़नी चाहिये । मुल्क का क्या होगा – इससे मीडिया को कुछ लेना देना नहीं । बर मरै चाहे कन्या, हमे दक्षिणा से काम ।


माननीय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ का बाबरी विवाद पर फैसला आने की खबर मिलते ही मीडिया की बांछें खिल गयीं । बिल्ली के भाग से छींका टूटा । ऐसा सुनहरा मौका बार-बार नहीं आता । प्रयागराज में कुंभ मेला बारह साल बाद जुड़ता है ।


मीडिया मुगलों को एहसास हुआ कि बेहद संगीन मामला है, मुल्क के आसमान पर संकट के बादल गहरा रहे हैं । बादल फटते हैं तो कयामत आती है । आसमान ही फट पड़ा तो क्या होगा । इस मुल्क के लोग तो जाहिल, गंवार और बर्बर हैं । धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ गयी है । इस मौके पर लोकतंत्र के चौथे खंभे को टट्टर की आड़ से ऐसा तीर चलाना चाहिये कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे ।


सेकुलर मीडिया ने जंगल में रोने वाले सियारों को शर्मिंदा कर दिया और वे एक स्वर में हुआ हुआ करले लगे । इस सियार रोदन प्रतियोगिता का चैम्पियन कौन था, निशाने पर कौन साम्प्रदायिक तत्व थे, इसका फैसला हम पाठकों पर छोड़ देते हैं ।


बहरहाल कुछ नमूने तो पेश करने ही पडेंगे । टाइम्स नाऊ चैनल के अर्णव गोस्वामी के चैनल में भाजपा नेता और पेशे से माननीय सुप्रीम कोर्ट के वकील रविशंकर प्रसाद तशरीफ लाये । गोस्वामी ने उन्हें देख कर कमर के नीचे चोट करने का मन बनाया । ऐसे मौकों पर खास तौर से अंग्रेजी सेकुलर मीडिया के निशाने पर भाजपा का होना लाजिमी है । गोस्वामी ने रविशंकर से पूछा – फैसला आने पर भाजपा का अगला कदम क्या होगा ?

रविशंकर ने छूटते ही सवाल किया – आपने मुझे बतौर वकील परिचर्चा में बुलाया है । अगर आप चाहते हैं कि मैं भाजपा नेता के रूप में जवाब दूं, तो मुझे कुछ नहीं कहना है । आप मुझे गलत रास्ते पर जाने के लिये उकसा रहे हैं ।


गोस्वामी ने होशियारी से अपना बचाव करते हुये कहा – मेरा यह मकसद नहीं था । रामजन्मभूमि के लिये रथयात्रा भाजपा नेता अडवाणी ने की थी । बाकी सारे पैनलिस्ट मुस्कुरा रहे थे । उस वक्त सारे सेकुलर पाखंडियों को लग रहा था कि अदालत का फैसला बाबरी मस्जिद के पक्ष में आयेगा  इसलिये लगे हाथ भाजपा, आर. एस. एस., विश्व हिंदू परिषद को लपटने में कोई हर्ज नहीं है । इसके एवज में धर्मनिरपेक्षता का गोल्डमेडल हासिल होगा । लेकिन रविशंकर, अर्णव गोस्वामी से ज्यादा तेजतर्रार निकले । उन्होंने कहा – मुकद्दमें का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट से हो जाने दीजिये । इस लम्बी बहस का जवाब थोड़े में नहीं दिया जा सकता है ।


नमूना नंबर दो । जी न्यूज के महान बुध्दिजीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेई ने डाक्टर मुरली मनोहर जोशी से पूछा – अदालत का फैसला आने के बाद क्या होगा ।


जोशी जी ने कहा – फैसला आयेगा तब देखा जायेगा आप अभी से अफवाह और सनसनी क्यों फैला रहे हैं ।


फैसला आया तो सारे सेकुलर पाखंडियों के कलेजे पर सांप लोट गया । आगे का कीचड़ उछालू प्लान मुलतवी करना पड़ा । टी आर पी और धंधे का भी बड़ा नुकसान हुआ । अदालत ने मान लिया था कि रामजन्मभूमि की पहचान उसी जगह के रूप में की जाती है जहां बाबरी ढांचा खड़ा था । उस जगह से मूर्तियां हटायीं नहीं जा सकती हैं ।


सेकुलर मीडिया को देख कर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की कहावत याद आती है । देश की हिंदू-मुस्लिम जनता ने बड़े धीरज और शांति से फैसला सुना । उसने देश के सेकुलर पाखंडियों को आईना दिखा दिया । जाहिर हो गया कि अगर सेकुलर मीडिया और धर्मनिरपेक्ष पाखंडी नेता खामोश बैठे रहते तो भी देश का जनमानस इतना समझदार है कि वह अदालत के फैसले पर भड़क कर सड़कों पर नहीं आता । देश के आम लोग मीडिया और सेकुलर पाखंडी नेताओं से ज्यादा समझदार हैं ।


एक टिटिहरी आसमान की तरफ पंजे उठा कर पीठ के बल लेटी थी । उसे भरोसा था कि अगर आसमान गिरेगा तो वह उसे अपने पंजे पर रोक लेगी । टिटिहरी की गलतफहमी उसे मुबारक । ज्यादा क्या कहें, सिर्फ यही अर्ज करनी है कि इन पांखडी लीडरों और मीडिया माहिरों का नकाब हटा कर उनका असली चेहरा देखने की जहमत उठायें । ये वोटबैंक और पैसे के लिये कुछ भी करने को उधार खाये बैठे हैं ।

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

15 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
October 3, 2010

फैसला आया तो सारे सेकुलर पाखंडियों के कलेजे पर सांप लोट गया । आगे का कीचड़ उछालू प्लान मुलतवी करना पड़ा । टी आर पी और धंधे का भी बड़ा नुकसान हुआ । प्रिय मिश्र जी …. आप के सोजन्य से हमे आदरणीय मिश्र जी की प्रतिभा के दर्शन हो जाते है …. सचमुच बहुत -२ आभारी है आपका यह जागरण मंच … (रब्ब + खुदा + गाड + वाहेगुरु} =एक नूर +एकजोत की किरपा से यह फेसला पूरी तरह लागू हो जाए ..यही कामना है

    K M Mishra के द्वारा
    October 12, 2010

    प्रिय राजकमल वंदेमातरम ! आपको व्यंग पसंद आया । टिप्पणी के लिये आभारी हूं ।

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
October 3, 2010

प्रिय मिश्रा जी, आदरणीय नरेश मिश्रा जी ने बिलकुल सही कहा है। – इन पांखडी लीडरों और मीडिया माहिरों का नकाब हटा कर उनका असली चेहरा देखने की जहमत उठायें । ये वोटबैंक और पैसे के लिये कुछ भी करने को उधार खाये बैठे हैं । भाई साहब लोग समझदार होते जा रहे है पर यह मिडिया एव राजनेताओं को यह खामोशी पसंद नही आ रही वह कोई न कोई चिंगारी छोडने से बाज नही आ रहे है, क्‍योकि रोटी उन्‍होंने भी खानी है, यदि आंच नही होगी तो वह रोटी किस पर सेकेंगे। एक जोरदार थप्‍पड के लिए बधाई।

    K M Mishra के द्वारा
    October 12, 2010

    प्रिय दीपक जी वंदेमातरम ! आपको व्यंग पसंद आया । टिप्पणी के लिये आभारी हूं ।

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 2, 2010

मिश्रा जी प्रणाम, अरे इ मीडिया वालन के बस चलत तो दंगा करवाय देतेन…अब का करैं हम जनता तो अब इ समझ ही गए है की लड़ाई -झगड़ा में कुछ रख्खा नै न ……..गम्भीर मुद्दे को भी हँसते-हँसते कहने के लिए…..बधाई……. आकाश तिवारी

    K M Mishra के द्वारा
    October 12, 2010

    प्रिय आकाश जी वंदेमातरम ! आपको व्यंग पसंद आया । टिप्पणी के लिये आभारी हूं ।

Soni garg के द्वारा
October 2, 2010

वाह मिश्रा जी क्या खूब लिखा है यही है आज के नेता और आज का मीडिया नेता तो किस कदर उधर खाए बैठे है इसका उधारण मुइलायम सिंह जी दे रहे है ! अब यही दुआ है की लोग इनकी चलो को समझे और इनसे निबटे !

    K M Mishra के द्वारा
    October 12, 2010

    सोनी जी वंदेमातरम ! आपको व्यंग पसंद आया । टिप्पणी के लिये आभारी हूं ।

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 2, 2010

मिश्रा जी अभिवादन, अब मुझे विश्वास हो गया है की मीडिया को सबक सिखाये बिना नहीं छोड़ा जायेगा. कुछ दिन पहले एक फिल्म देखी जिसमे इसकी मिटटी पलित की गयी है. आज आपके पोस्ट से पहले एक और पोस्ट पढ़ा, दोनों में ही इसकी बखिया उधेडी गयी है. ये भी क्या करे सर जी बिजनस जो करना है. अब वह दिन लद गए जब किताबे और पत्रिकाए पढने और जानने के लिए खरीदी जाती थीं. अब हम चटखारा पसंद हो गए है. बेचने और दिखाने की लिए वैसा चाहिए भी तो. छीछालेदर करने वाली मीडिया को बढ़िया लताड़ पर बधाई स्वीकारिये सर जी.

y.dubey के द्वारा
October 2, 2010

आदरणीय मिश्र जी, मीडिया के दोगलेपन को अब हर कोई समझ चूका है,इनमे एक खास बात देखि होगी की ये सिर्फ और सिर्फ भाजपा के विरोध में ही लिखते है ,हर जगह सिर्फ एक ही सर है की राजनितिक पार्टी के कारन ही अयोध्या विवाद पैदा हुआ मतलब की भाजपा के १९९२ के पहले सबकुछ सद्भावपूर्ण था मस्जिद है तो सद्भाव मंदिर की बात की तो सौहार्द नहीं रहा. सच्चाई ये है की भारतीय समाज में एक भी ऐसा पत्रकार नहीं जो की सही अर्थो में गणेश शंकर विद्यार्थी के आदर्शो का पालन करता हो.

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 2, 2010

नमस्कार मिश्रा जी,ब्यंग के माध्यम से एक अच्छा प्रहार देखने को मिला,धन्यवाद

roshni के द्वारा
October 2, 2010

मिश्रा जी, अदालत का फैसला आने के बाद जिस तरह भारत की जनता शांत रही उसके लिए बधाई .. एक बार फिर सिद्ध हो गया की दंगे अराजकता नेता लोग ही फेलाते है जनता को इन मसलों पे लड़ने की फुर्सत नहीं है….. वोह तो शांति से ही इसका समाधान चाहती थी……. और मिडिया तो जिस तरह हर शहर में और हर गली में coverage करने में लगा था इससे ये आभास हो रहा था जैसे की कोई असमान से आग बरसाने वाली है ……. इन्होने तो बहुत ही सनसनी फेला रखी थी मगर भगवन का शुक्र है सब थक और शांत रहा …..

Ramesh bajpai के द्वारा
October 2, 2010

प्रिय श्री मिश्रा जी – “साही मरै मूड़ के मारे, हम संतन से का मतलब ” इस से ज्यादा सटीक और कुछ हो सकता है मुझे पता नहीं . बहुत बहुत बधाई . इनके इरादों को जग जाहिर करने के लिए . आदरणीय दद्दा को मेरा प्रणाम .

आर.एन. शाही के द्वारा
October 2, 2010

श्रद्धेय मिश्रा जी, प्रणाम! सुबह-सुबह दिमाग को अच्छी खुराक़ पिलाई आपने … साधुवाद । चौथा स्तम्भ कहा और माना जाने वाला मीडिया हमारी वैचारिक स्वतंत्रता और शांति का प्रहरी है, यह मिथक तो कबका टूट कर बिखर चुका है, अब बाक़ी है तो सिर्फ़ इसकी स्वनामधन्यता । ‘मीडिया’ जो शब्द है, उसका हिन्दी में प्रयोग करते समय कोई जेंडर (लिंग) नहीं होता । आप कह सकते हैं कि ‘यह भारत का मीडिया है’, वहीं आपको यह कहने की भी छूट है कि ‘यह भारत की मीडिया है’ । अब जिसका कोई लिंग ही नहीं रहा, उससे पुंषत्व वाले कृत्य की उम्मीद करना ही बेकार है । इससे ज़्यादा कुछ लिखने की इच्छा नहीं हो रही है ।

    K M Mishra के द्वारा
    October 2, 2010

    आरणीय शाही जी प्रणाम । भारत की सेकुलर मीडिया पर इससे बड़ी टिप्पणी और कुछ नहीं हो सकती । भारत के जनमानस को समझने वाला और पत्रकारिता के इथिक्स पर दृढ रहने वाला दैनिक जागरण आज इसीलिये दुनिया का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अखबार है क्योंकि यह पाखंडी कम्युनिस्टों से दूर है और भारतीय संस्कृति के करीब है ।


topic of the week



latest from jagran