सत्यमेव .....

हास्य व्यंग्य एक्सप्रेस

29 Posts

624 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 799 postid : 411

जग बौराना : शहीदों के कफनखसोट

Posted On 31 Oct, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

लेखक: श्री नरेश मिश्र

साधो, ताली बजा कर इस सीनरी का स्वागत करो । देश के विकास का सब्जबाग दिखाने वाली कांग्रेस ने जनता के सामने मुखौटा हटा कर अपनी असली शक्ल दिखा दी । मैडम सोनिया गांधी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था तो सारे कांग्रेसी चारण उनके अंदाजेबयां पर सौ जान से कुर्बान हो गये थे । यह बात दीगर है कि गुजरात की जनता को उनका बयान पसंद नहीं आया। उसने चुनाव में कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया ।

अब महाराष्ट्र मे बोतल से कांग्रेस का जिन्न बाहर निकल आया है । बोतल का ढक्कन तो उसी दिन खुल गया था जिस दिन महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष माणिक राव ने कैमरे पर कबूल किया था कि सोनियाजी की वर्धा रैली के लिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से दो करोड़ की वसूली की गयी । चव्हाण ने कांख कांख कर कांग्रेस को दो करोड़ का यह जजिया अदा दिया ।

मीडिया में यह बातचीत उछली तो कांग्रेस हाईकमान ने माणिकराव को दिल्ली तलब कर लिया । शायद  उन्हें आगाह किया गया कि कांग्रेस को इस तरह जनता के सामने बेपर्दा करना बेजा हरकत है । माणिक राव बात करने से पहले आस-पास नजर डाल लिया करें । दीवारों के भी कान होते हैं । कैमरा दीवार से ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि उसकी आंख भी होती है । वह सिर्फ सुनता ही नहीं देखता भी है ।


देशवासियों को बताया गया कि इस मामले में गहराई से जांच हो रही है । जांच का बहाना जरूरी था । बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं । इसलिये मुर्दे को कालीन में छिपा कर रखने में ही दानिशमंदी थी । लेकिन मुर्दा तो मुर्दा ठहरा । उसे नजरों से छिपाया जा सकता है लेकिन उसकी गंध पर काबू नहीं पाया जा सकता । गरज ये कि गंध बेपनाह उड़ कर देशवासियों के नथुने में भर गयी ।


मामला मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी का है । जिस जमीन पर सोसायटी ने इमारत खड़ी की वह पहले रक्षा विभाग के कब्जे में थी । उसे पहले फौजी अफसरों और नेताओं ने सेना के अधिकार से मुक्त कराया । इस नापाक गठजोड़ का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ । इस जमीन पर कारगिल युद्ध के शहीदों की विधवाओं को बसाने के लिये छः मंजिली इमारत का प्रस्ताव पास कराया गया । कुदरत के करिश्में से छः मंजिल की यही इमारत आसमान की तरफ उठने लगी और 31 मंजिल पर आकर रूकी ।

इस इमारत में फ्लैटों पर काबिज महान विभूतियों के नाम सुनकर चौंकने की जरूरत नहीं है । इन फ्लैटों पर मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की सास, उनकी बहू और दूसरे रिश्तेदारों को कब्जा मिला । स्थल सेना के पूर्व कमाण्डर इन चीफ दीपक कपूर, नेवी के बड़े एडमिरल और दूसरे सैनिक अफसरों को भी फ्लैट बांटे गये । कांग्रेस के विधायकों को भी इस लूट में हिस्सा मिला । शिवसेना के एक नेता को भी इस डकैती पर जबान बंद रखने के लिये हिस्सा दिया गया । डकैती के बचे खुचे माल को मालदार नागरिकों ने आपास में बांट लिया । इस इमारत की तामीर में कारगिल शहीदों का नाम भुनाया गया । इन शहीदों की विधवाओं को एक भी फ्लैट नहीं दिया गया ।



बुरा हो मीडिया का, उसने मुख्यमंत्री को बेनकाब कर दिया । अब कांग्रेस का असली चेहरा देख कर देशवासी दंग है । नरेन्द्र मोदी तो कांग्रेस की डिक्शनरी में मौत के सौदागर हैं लेकिन कांग्रेस क्या है । क्या उसे शहीदों के कफनचोर या कफनखसोट की संज्ञा देने में कोई हर्ज  है । जिन शहीदों को कमांडर इन चीफ दीपक कपूर ने चुस्त सलामी दी थी क्या उनके परिवारजनों के साथ यही सलूक होना चाहिये था ।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की नजर में देश की कौन सी शक्ल है । उनके देश की सीमा उनकी सास, बहू और चंद विधायकों पर  जाकर खत्म हो जाती है । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कोयी अनहोनी नहीं की है  । उनके पहले पूर्व केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री सतीश शर्मा अपने रिश्तेदारों, चापलूसों, नौकर-चाकर, ड्राइवरों तक को पेट्रोल पंप बांट कर सही रास्ता दिखा चुके हैं । अशोक चव्हाण तो कांग्रेस द्वारा दिखाये रास्ते पर चल रहे हैं ।

साधो, एक झूठ को छिपाने के लिये हजार झूठ बोलना सियासी परंपरा है । अशोक चव्हाण ने जो सफाई दी वह काबिले गौर है । उन्होंने बताया आदर्श हाउसिंग सोसायटी को मंजूरी देते वक्त वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नहीं थे । इस सादगी पर कौन न मर जाये ए खुदा । अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री नहीं थे तो क्या वे कांग्रेस के मंत्री भी नहीं थे । कांग्रेस बड़ी पार्टी है । हाथ की सफाई दिखाना, लम्बे हाथ मारना कांग्रेस की आदत, इसीलिये तो हाथ के पंजे को कांग्रेस का चुनाव चिन्ह बनाया गया है । कांग्रेस के फौलादी पंजों में देशवासियों की गर्दन जकड़ी है । राम भली करें, देश बच जाये तो अल्ला मियां का शुक्रगुजार होना चाहिये ।

साधो, अभी तुमने क्या देखा है ।  70000 करोड़ के कामनवेल्थ गेम्स घोटला का असली चेहरा देखोगे तो तुम्हारी अक्ल शीर्षासन करने लगेगी ।शक सिर्फ यह है कि जो महकमें इस घोटाले की जांच कर रहे हैं अपना फर्ज निभायेंगे या नहीं ।

अशोक चव्हाण का चेहरा देख कर हमें कवि जगन्नाथदास रत्नाकर की लंबी कविता ‘सत्य हरीश्चन्द्र’ का एक अंश याद आ गया जो इस प्रकार है -



कीन्हे कम्बल बसन तथा लीन्हें लाठी कर ।
सत्यव्रती हरिचंद हुते टहरत मरघट पर ।
कहत पुकार पुकार बिना कर कफन चुकाये ।
करहि क्रिया जनि कोउ सबहिं हम देत बताये ।

सत्यवादी राजा हरीशचन्द्र ने अपना कर्तव्य निभाने के लिये जहां अपनी रानी से बेटे के कफन का टुकड़ा कर में लिया था वहीं आज के राजा अशोक चव्हाण तो हरीशचन्द्र के भी नगड़ दादा निकले । उन्होंने कारगिल शहीदों का कफन खसोट लिया । उन्हें यह धत् कर्म करने में कोयी शर्म महसूस नहीं हुयी ।

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

19 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajshahil के द्वारा
November 10, 2010

यदि आप इस लेख में मुस्लिमो की बुराइयाँ करते तो अच्छा लगता आप मुस्लिमों की हर लेख में बुराई करे आपका ब्लॉग सुपरहिट हो जायेगा ऐसे फालतू के लेख आप पर शोभा नहीं देते

deepak joshi के द्वारा
November 9, 2010

प्रिय मिश्र जी, आदरणीय नरेश जी ने सही ही कहा है – कांग्रेस बड़ी पार्टी है । हाथ की सफाई दिखाना, लम्बे हाथ मारना कांग्रेस की आदत, इसीलिये तो हाथ के पंजे को कांग्रेस का चुनाव चिन्ह बनाया गया है । बड़ी पार्टी बडा पेट – उस पर हाजमा दूरूस्‍त, आज तक किसी घोटाले की जांच रिपोर्ट सही आई है जो अब आऐगी सब कुछ समय निकलने के बाद इन्‍ही कफनों के साथ जमीदोश हो जाएगा। फिर यही पार्टी बहुमत से आएगी, और यही किस्‍से व फाईले गायब कर दी जांऐगी और यह कफनखसोटी चलती ही रहेगी। बहुत ही अच्‍छी रचना के लिए धन्‍यवाद।

atharvavedamanoj के द्वारा
November 4, 2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||…………………………….मनोज कुमार सिंह ”मयंक” आदरणीय मिश्रा जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

Rashid के द्वारा
November 3, 2010

मिश्र सर, अच्छा एवं स्पष्ट लेख.. मेरे पिछले लेख “क्या इस्लाम वैदिक धर्म…..” पर आप की प्रतिक्रिया की कमी महसूस होती है !! आप सभी को दीपावली की शुभकामनाये राशिद

Arvind Pareek के द्वारा
November 1, 2010

आदरणीय श्री मिश्र जी, सादर प्रणाम । कफनखसोट शब्‍द ही उचित प्रतीत हो रहा है । क्‍या पता इस कर्म को करने वालों नें पहले ही भविष्‍य दिखा लिया हो और विधवाओं को दिए जानें वाले फ्लैटों का प्रबंध होने वाली विधवाओं के लिए कर दिया हो । अब तो चव्‍हाण साहेब को आलाकमान से नाराजगी के बावजुद माफी भी मिल गई है । अरविन्‍द पारीक

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 1, 2010

आदरणीय श्री मिश्रा जी, ऐसे कृत्य करने वाले को मौत की सजा का प्रावधान जबतक नहीं बनेगा ये काम अनवरत चलता रहेगा…सब के सब चोर हैं सा…………….. आकाश तिवारी http://aakashtiwaary.jagranjunction.com

October 31, 2010

व्यंगात्मक शैली में एक गंभीर विषय को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया आपने. बधाई.

ashvinikumar के द्वारा
October 31, 2010

परम आदरणीय़ मिश्रा जी एवं बन्धु बहुत खुबसूरत कटाक्ष [कुछ लोग कह रहे हैं ???जहाँ अधिक गन्दगी होगी पहले उसी को व्यक्त किया जाता है ,,] जय भारत

rajkamal के द्वारा
October 31, 2010

ऐसा लगता है की आप भी किसी समस्या के शिकार हो गए है … इसमें टिपण्णी का जवाब देना बहुत मुश्किल होता है … बस किसी ना किसी तरह जुगाड़ भिड़ा कर रचना पोस्ट हो जाए यही गनीमत होती है …. खैर ..आप इतनी मुश्किलों के बावजूद अपनी उप्सिथ्ती दर्ज करवा रहे है …आपका बहुत -२ आभार (इस दूसरी टिप्पणी को ब्याज के खाते में जमा कर लेना )

rajkamal के द्वारा
October 31, 2010

आदरणीय मिश्रा जी…नमस्कार ! आपने डैनीअल जी की पोस्ट पे यह मशवरा दिया था की अपनी पोस्ट को बहुत ज़ल्दी -२ साथ के साथ अपडेट करते रहना चाहिए …लेकिन आप ….

R K KHURANA के द्वारा
October 31, 2010

प्रिय मिश्र जी, सारी पोल खिल कर रख दी ! अच्छा व्यंग खुराना

saima malik के द्वारा
October 31, 2010

कहाँ हैं मिश्र जी आप,क्या आप केवल कांग्रेस पार्टी के ही धुर विरोधी हैं,जो केवल कांग्रेस की बखिया उखाड़ते हैं,…………वैसे आप कहेंगे,कि कांग्रेस के काम ही “बखिया उखेड़ने” लायक हैं,……………..मुझे लगता है सभी नालायक हैं………………..जनता के खलनायक हैं………………..लेख अच्छा है.

saima malik के द्वारा
October 31, 2010

कहाँ हैं मिश्र जी आप,क्या आप केवल कांग्रेस पार्टी के ही धुर विरोधी हैं,जो केवल कांग्रेस की बखिया उखाड़ते हैं,…………वैसे आप कहेंगे,कि कांग्रेस के काम ही \"बखिया उखेड़ने\" लायक हैं,……………..मुझे लगता है सभी नालायक हैं………………..जनता के खलनायक हैं………………..लेख अच्छा है.

sdvajpayee के द्वारा
October 31, 2010

अच्‍छा व्‍यंग्‍य।

nishamittal के द्वारा
October 31, 2010

आदरणीय मिश्र जी,आँखे खुल गयी अच्छी प्रकार से.परन्तु हमारी ,सरकार की नहीं,शहीदों को भी नहीं बक्शा.शर्म …………………………..

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 31, 2010

आदरणीय मिश्रा साहब सादर प्रणाम………………आपके द्वारा हास्य ब्य्न्गो पर कुछ कहने को शेष रही नहीं जाता,क्या खूब तराशते है आप…………..नरेन्द्र मोदी तो कांग्रेस की डिक्शनरी में मौत के सौदागर हैं लेकिन कांग्रेस क्या है…………इसका उत्तर अगर कहीं से मिले तो बताईयेगा जरुर लेकिन हाँ उत्तर किसी कंग्रेशी से मत पूछियेगा क्योंकि इन्हें बोलने के पहले सोचना…………………..धन्यवाद!

आर.एन. शाही के द्वारा
October 31, 2010

श्रद्धेय मिश्रा जी, प्रणाम! सुबह-सुबह मरघट के सौदागरों का साक्षात्कार करा दिया आपने, पता नहीं दिनभर क्या होने वाला है । उसके बाद भी बेहयाई देखिये कि इस्तीफ़ा देने के बाद भी उसकी मंज़ूरी पार्टी अध्यक्षा के विवेक पर छोड़ दी माननीय मुख्यमंत्री ने । वो भी क्या लोग थे जो इस्तीफ़ा देकर फ़िर टस से मस नहीं होते थे । इनकी तुलना हरिश्चन्द्र से किसी भी बहाने न करें तो अति कृपा होगी । साधुवाद ।

Ramesh bajpai के द्वारा
October 31, 2010

कहत पुकार पुकार बिना कर कफन चुकाये । करहि क्रिया जनि कोउ सबहिं हम देत बताये । प्रिय मिश्रा जी वह सतयुग कै बात , यह घोर कलजुगु . कुछु तो असर रहिबे करी , बाकि दद्दा के पाय दुई बार लागि

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
October 31, 2010

बेहतरीन लेख मिश्रा जी…………. हाथ की सफाई दिखाना, लम्बे हाथ मारना कांग्रेस की आदत, इसीलिये तो हाथ के पंजे को कांग्रेस का चुनाव चिन्ह बनाया गया है । कांग्रेस के फौलादी पंजों में देशवासियों की गर्दन जकड़ी है ! हर वाक्य लाजवाब है………. हार्दिक बधाई………..


topic of the week



latest from jagran