सत्यमेव .....

हास्य व्यंग्य एक्सप्रेस

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कुछ मीठा हो जाये

Posted On: 12 Dec, 2010 में

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प्रस्तुत है “उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद” के प्रांगण में हाथ से बनी मूर्तियों के चित्र ।










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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद के द्वारा
December 21, 2010

तस्वीरें तो बहुत ख़ूब हैं गुरुवर, लेकिन आप कहाँ ग़ायब हैं| आपकी कमी महसूस हो रही है|

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 19, 2010

खूबसूरत कलाकृतियाँ……………….

December 14, 2010

मिश्र जी नमस्कार, भाई मान गए, बिना कुछ लिखे भी बहुत कुछ बता दिया आपने.

Dharmesh Tiwari के द्वारा
December 14, 2010

आदरणीय मिश्रा जी सदर नमस्कार,बेहतर कलेक्सन,धन्यवाद!

rajkamal के द्वारा
December 13, 2010

आदरणीय मिश्रा जी …नमस्कार ! भाई जी का मेरे पास फोन आया था … वोह कह रहे थे की किराया गया भाड़ में …. कम से कम मेरा कैमरा तो वापिस दिलवा दो … अब पता नहीं मेरी बात आप मानेंगे की नहीं … बस पारीख जी के विश्वाश की लाज रख लेना …

roshni के द्वारा
December 13, 2010

मिश्र जी नमस्कार अपने तो बहुत सुन्दर खजाना हम सबके समक्ष पेश किया …….. एक से बढकर एक कलाकृति धन्यवाद हम सब को ये सुन्दर चित्र का दर्शन करवाने के लिए

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 13, 2010

आदरणीय श्री शाही जी, एक नए फ्लेवर के लिए आपका धन्यवाद…. आपके एक मजेदार व्यंग की प्रतीक्षा में.. आकाश तिवारी http://aakashtiwaary.jagranjunction.com

आर.एन. शाही के द्वारा
December 13, 2010

श्रद्धेय मिश्र जी, आपके प्रेमपूर्ण प्रकम्पित हाथों से बंटी इस मिठाई का स्वाद अत्यंत मधुर है ।

Rashid के द्वारा
December 13, 2010

कहते है पत्थर भी बोलते है !! यह चित्र इसको साबित करते है !! राशिद

deepakkumarsahu के द्वारा
December 13, 2010

वाह सर जी क्या फोटो हैं !!

R K KHURANA के द्वारा
December 13, 2010

प्रिय मिश्र जी, सुंदर चित्रण के लिए बधाई ! सच में मीठा हो गया ! आपका व्यंग बहुत दिनों से नही आया ! व्यंग का स्वाद भी चाखाईये ! राम कृष्ण खुराना

abodhbaalak के द्वारा
December 13, 2010

Mishra Ji, sundar aur sajeev chirtan, sahi me subah subah meetha khila diye aap to . http://abodhbaalak.jagranjunction.com 

nishamittal के द्वारा
December 13, 2010

सुन्दर चित्र मिश्र जी.

Ramesh bajpai के द्वारा
December 13, 2010

प्रिय श्री मिश्रा जी बहुत खूब ….. बिलकुल मीठा हो ही जाये चाय भी पी लेगे . कृतियों को जौहरी की नजर जो मिल गयी बधाई


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