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हास्य व्यंग्य एक्सप्रेस

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केजरीवाल का रायता

Posted On: 19 Feb, 2014 हास्य व्यंग में

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किशोर उम्र में कामेडियन लॉरेल-हार्डी की एक अवाक फिल्म देखी थी । फिल्म में दोनों मसखरे] अनाड़ी] बेरोजगार कामेडियनों ने लंदन के बाजार में एक घड़ीसाज की दुकान खोली । घंटों इंतेजार के बाद एक बदकिस्मत ग्राहक  अपनी एलार्म टेबल-वॉच लेकर दुकान पर आया । लॉरेल-हार्डी ने मुस्कुराहट बिखेर कर ऊॅंची टोप वाले ग्राहक का स्वागत किया । ग्राहक ने उन्हें एलार्म घड़़ी दिखाई । दोनों मसखरों ने घड़ी को उलट पलट कर देखा । मरम्मत का मेहनताना तय किया । फिर दोनों पेचकस लेकर घड़ी के पुर्जे खोलने लगे । दोनों ने एक एक पुर्जा खोलकर अलग कर दिया, फिर वे उसकी मरम्मत के बारे में गहराई से सोचने लगे । अधेड़ ग्राहक उत्सुकता से उनकी कारगुजारी देख रहा था । सलाह मशवरे के बाद दोनों मसखरे इस नतीजे पर पहुंचे कि वे घड़ी की मरम्मत नहीं कर सकते । लॉरेल ने ग्राहक से इशारा कर उसका टोप आगे करने को कहा । उन्होंने ग्राहक के टोप में घड़ी के कलपुर्जे रख दिये और ग्राहक से इशारा कर कहा – इसकी मरम्मत नहीं हो सकती, आप इसे ले जाईये ।


दिल्ली के उन्चासदिनी मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की नौटंकी देखकर हमें लॉरेल-हार्डी की याद बेसाख्ता आई । लॉरेल-हार्डी की आत्मा को भी केजरीवाल का करिश्मा याद आया होगा लेकिन हम यकीनन कह सकते हैं कि लॉरेल-हार्डी केजरीवाल का करिश्मा देखकर हंसने के बजाय रो रहे होंगे । उन्हें अफसोस हुआ होगा कि उन्होंने यह कमेडी फिल्म क्यों बनाई जिसकी नकल कर केजरीवाल ने दिल्लीवालों का दिल  तोड़ दिया ।


साहेबान, मेहरबान  ! गौर फरमायें, पहला करिश्मा । अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के वक्त दिल्ली की सड़कों पर बैनर लगाकर दावा किया था कि वे अन्ना हजारे का जनलोकपाल विधेयक पास करायेंगे । उनकी औकात नहीं थी लेकिन उन्होंने औकात के बाहर बयाना लिया । दिल्लीवासियों का पचास फीसदी बिजली बिल कम करने और सात सौ लीटर रोजना पानी देने का वायदा भी था । वोटर तो केजरीवाल के मंच भाषण से ठगे गये । आप पार्टी के घोषणापत्र में इन वायदों पर कुछ शर्तें भी लिखी थीं । आमतौर पर ठग व्यापारी अपने आकर्षक विज्ञापनों में ग्राहकों को ठगने के लिये (शर्तें लागू) लिख देते हैं । व्यापार जगत की यह ठगी सियासत में भी काम आती है । योगेन्द्र यादव अपनी मसीहाई वाणी में फरमाते हैं – वोटरों को घोषणपत्र पढ़ लेना चाहिये था । आप पार्टी के चालबाज ठगों से कोयी ये नहीं पूछता कि सियासी पार्टियों के घोषणपत्र कितने वोटर पढ़ते हैं । लगभग डेढ़ करोड़ वोटरों में आपने कितने घोषणापत्र बॉंटे थे । कितने वोटर वोट देने से पहले घोषणपत्र पढ़ते हैं । वे घोषणापत्र पढ़ना जानते हैं या नहीं ।


सवाल तो तमाम हैं । जवाब देने के लिये आप के चालबाज प्रवक्ता हैं, जो ऊॅंची आवज में बुलेट ट्रेन की चाल से बोलते हैं । वे किसी और को  बोलने नहीं देते । हिटलर के प्रचार मंत्री गॉयबेल्स ने कहा था कि सौ बार झूठ बोलने पर वह सच महसूस होने लगता है ।  गॉयबेल्स कब्र में बेचैनी से करवटें बदलता होगा । केजरीवाल ने तो एक बार झूठ का तूफान खड़ा कर दिल्ली को लूट लिया । ईरानी लुटेरा नादिरशाह जिन्दा होता तो अचरज से ऑखें फाड़ कर कहता – जनाब इतनी बेदर्दी से तो हमने भी दिल्ली वालों को नहीं लूटा था ।


केजरीवाल ने कहा था – मैंने कांग्रेस और भाजपा का रायता फैला दिया । यकीनन उन्हें रायता पसंद है । रायता का ज़ायका खट्टा होता है, केजरीवाल को खांसी की शिकायत हैं, उन्हें रायते का ज़ायका लेने से बचना चाहिये । बुरी आदत आसानी से नहीं छूटती । केजरीवाल अब अपनी पार्टी का रायता फैलायेंगे । देशवासियों की सेहत के लिये यह रायता यकीनन ज़हर साबित होगा ।

लेखक – नरेश मिश्र

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चित्र सभार फेसबुक मित्रमंडली

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