सत्यमेव .....

हास्य व्यंग्य एक्सप्रेस

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“आप” (केजरीवाल) का रामबाण नुस्खा ।

Posted On: 22 Feb, 2014 हास्य व्यंग में

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लेखक: नरेश मिश्र

साहबान,मेहरबान,कद्रदान ! न तो मैं कोई वैद्यडाक्टर या हकीम हूँन पहुंचा हुआ सियासी संन्यासी फकीर । मैं आप ही की तरह एक गरीब आम आदमी हूँ । सियासत की तीर्थयात्रा का मंसूबा बनाकर मैं अन्ना हजारे की सेवा में प्रस्तुत हुआ । मेरे दंड प्रणाम से गॉंधीवादी सन्यासी अन्ना हजारे प्रसन्न हुये । मेरे मन में मामूली नौकरी छोड़कर सियासत के शिखर पर झंडा लहराने की भावना थी,लेकिन मैं अपनी इस भावना को मन में ही छिपा कर मामा मारीच मृग की चाल चलना चाहता था ।

गांधीवादी सन्यासी अन्ना हजारे सरल स्वभाव,सच पर अडिग रहने वाले महात्मा हैं ? उन्हें क्या पता था कि मेरे मन में राम,बगल में छूरी हैं । उन्होंने मुझे सत्य,अहिंसा,सत्याग्रह का उपदेश दिया । उनका उपदेश मेरे लिये कचरे से ज्यादा अहमियत नहीं रखता था ।

मैंने अन्ना उपदेश दाहिने कान से सुनकर बायें कान से निकाल दिया । वापसी के सफर में मुझे सियासी शैतान मिला । उसने हंसकर मुझसे कहा – बच्चा अन्ना हजारे को भूल जाओ । मेरा नुस्खा आजमाओ । तुम पलक झपकते ही दिल्ली की गद्दी पर चढ़ बैठोगे ।

सियासी शैतान ने मुझे जो नुस्खा बतलाया,वह यूं हैं – साम्यवाद के पत्ते एक किलो,समाजवाद की छाल दो किलो,माओवाद के बीज ढाई सौ ग्राम,गांधीवाद का अर्क दस ग्राम,अराजकता की अंतरछाल दो किलो,झूठ का माजून दो किलो,इन सारी वस्तुओं को इकट्ठा कर पाखंड  की कड़ाही में डालो । इसमें मात्रा के मुताबिक आरोप का पानी डाल दो । कड़ाही के नीचे मीडिये की तेज आंच जला दो । दवा तैयार करते वक्त इसे झाड़ू की कलछुल से बार बार चलाते रहो । नफरत की बदबू फैलने लगे तो कड़ाही उतार दो । इसे मीठी वाणी की छाया में सूखने दो । बस लोकतंत्र की वहम में डालने की सिद्ध रामबाण दवा तैयार हो गयी । इसकी एक खुराक जवान को पिलाओगे तो वह सारी पढ़ाई लिखाई,ज्ञान गुण की बातें भूलकर तुम्हारे पीछे पगला जायेगा । खूसट बूढ़ों को पिलाओगे तो वह सियासत के संग्राम में अपना पेशा छोड़कर जवान की तरह कूदने को तैयार हो जायेगा । महिलाएं इसके सेवन से सुध बुध खोकर सियासत की उमंग तरंगो में बहने का मौका मिल जायेगा ।

नोट- ध्यान रहे,दवा पिलाते वक्त हर महत्वाकांक्षी मरीज को टोपी पहनाना मत भूलना । टोपी पहनकर दवा खाने से फौरन माकूल फायदा होता है । टोपी का महत्व दवा से कम नहीं । सियासत में टोपी पहनी और पहनाई जाती है । उछाली जाती है । टोपी पहनकर कोई कसम खाओ तो पाप नहीं लगता है ।

साहबान,मेहरबान,कद्रदान मैंने लोकतंत्र के हित में यह नुस्खा सार्वजनिक कर दिया । मैं लाहौर का वैद्य ठाकुर दत्त नहीं हूँ,जिन्होंने अमृतधारा का नुस्खा सार्वजनिक नहीं किया था । मैं सन्त रामानुजाचार्य की तरह लोकतंत्र का कल्याणकारी हूँ । उन्होंने गुरू का बताया गोपनीय मंत्र शिखर पर विराजमान होकर सबको बता दिया था । आप चाहें तो दवा घर में बना लें या मेरे दफ्तर में आकर मुफ्त ले जायें । आपसे कोयी शुल्क नहीं लिया जायेगा । आपको सिर्फ एक टोपी साथ लानी होगी ।

लोकतंत्र की लूट है,लूट सके तो लूट ।

अंतकाल पछताय वो,जो न बोले झूठ ।।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abhishek shukla के द्वारा
February 28, 2014

व्यंग विधा में महारत हासिल है आपको, बधाई!

R K KHURANA के द्वारा
February 27, 2014

प्रिय मिश्रा जी, आप मंच के सम्मानित व्यंगकार है कहाँ आप राजनीति के दल दल में फंस गए ! आप साहित्य कि सेवा कीजिए अच्छा लगता है ! यह लिंक देखिये ! http://khuranarkk.jagranjunction.com/2014/02/18/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%AE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6/ राम कृष्णा खुराना

kmmishra के द्वारा
February 24, 2014

जागरण जंक्शन एडमिन को पत्र. श्रीमान जी को सादर नमस्कार. मैं इस मंच का एक पुराना ब्लॉगर हूँ. और तकरीबन ३ साल बाद फिर इस मंच पर आया हूँ….किन्ही व्यक्तिगत कारणों से मैंने सार्वजनिक मंचों पर लिखना बंद किया था……….एक बहुत पुराने साहित्यकार और पत्रकार श्री नरेश मिश्र जिनकी आयु अब ८० वर्ष है, मैं उनके लेख भी अपने ब्लॉग पर डालता रहा था…मैंने ब्लॉग्गिंग बंद की तो उनके लेख भी नेट पर नहीं आये. हालांकि हर दिन उनके लिखे नाटक भारत में किसी न किसी रेडियो स्टेशन से प्रसारित होते हैं. वो आज भी ८० वर्ष की अवस्था में साहित्य जगत, टीवी., पत्रकारिता को अपना योगदान देते रहते हैं………………उनके कहने पर मैंने कई प्रयास किये जागरण जंकशन पर उनका ब्लॉग रजिस्टर कर ने के लेकिन पता नहीं क्या टेक्निकल फाल्ट है की ब्लॉग रजिस्टर नहीं हो पा रही है. हार कर मैंने अपने ही ब्लॉग पर उनके लेख फिर प्रकाशित करना शुरू किया है……उनका कहना है की हो सकता है की २०१४ का चुनाव उनके जीवन का आखिरी चुनाव हो और इस चुनाव में उनका कुछ योगदान होना चाहिए. सो उनके लिए मैं फिर से ब्लॉग्गिंग में सक्रिय हुआ…….. आपसे से विनम्र निवेदन है (जग बौराना) नाम से उनका ब्लॉग रजिस्टर करने में मेरी मदद करें. (आपको बताऊँ की व्यंग्य कालम लेखन में हम जानते हैं की शरद जोशी जी ने (प्रतिदिन) कालम कई वर्ष लिखा था. लेकिन नरेश जी ने अमृत प्रभात दैनिक पत्र में जग बौराना कालम ७ साल तक सप्ताह में ६ दिन लगातार लिखा है…जोशी जी से भी ज्यादा………….और उनके लिखे प्रहसन (मुंशी इतवारी लाल) को २१ साल तक आकाशवाणी के हवा महल प्रोग्राम में श्रोताओं का प्यार मिला ………….. और हो सके तो उनके लेखों को फीचर भी करिए ताकि वो अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे. धन्यवाद्.


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